मंगळवार, १७ फेब्रुवारी, २०२६

गांधी - “अहं ब्रह्मास्मि”। क्या इसे सही माना जाए?

👉1. गांधी ने ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा सन् 1906 में 38 वर्ष की आयु में ली — अर्थात 24 वर्ष का दांपत्य जीवन पूरी तरह जीने के बाद (चार संतानों के पिता बनने के बाद)। तो उनके ये प्रयोग कस्तूरबा के निधन के दो वर्ष बाद ही क्यों शुरू हुए?
2. चलिए मान लें कि (‘Collected Works of Mahatma Gandhi’ के अनुसार) गांधी मानते थे कि नोआखली की हिंसा उनके पूर्ण ब्रह्मचारी न होने से जुड़ी थी। अर्थात यदि वे पूर्ण ब्रह्मचारी होते तो जिन्ना के कहने पर मुसलमान हिंसा नहीं करते? (ऐसी दलील सुनकर हंसी नहीं आती?)
इसका अर्थ यह निकलता है कि गांधी बाहरी दुनिया और अपनी आंतरिक इच्छाओं को आपस में जोड़कर देखते थे। यानी “अहं ब्रह्मास्मि”। क्या इसे सही माना जाए?
क्या उन्हें 1946 में जाकर यह समझ आया कि वे अपनी ‘इच्छाओं’ पर नियंत्रण नहीं रख पाए, इसलिए हिंसा होती है? तो उससे पहले मोपला मुसलमानों की हिंसा, स्वामी श्रद्धानंद की हत्या, चौरी-चौरा कांड, जलियांवाला बाग हत्याकांड आदि के समय उनका यह ‘बुद्धि-विवेक’ कहां था?
3. सन् 1907 में ‘इंडियन ओपिनियन’ में गांधी ने लिखा था: “हर भारतीय का कर्तव्य है कि वह विवाह न करे। और यदि वह विवाह करने को विवश हो तो पत्नी के साथ यौन संबंध न रखे।” ऐसी अजीब सलाह देने का उद्देश्य क्या था? अपनी सनक थोपना? या हिंदुओं की जनसंख्या रोकना? क्योंकि मुस्लिम समुदाय तो गांधी की बात मानता नहीं था।
यदि आज कोई दक्षिणपंथी महानुभाव ऐसी सलाह दे, तो क्या प्रतिक्रिया होती? क्या तब भी उसे महात्मा कहकर पूजते?
4. गांधी ने सुचेता कृपलानी (जे.बी. कृपलानी की पत्नी) और प्रभावती (लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पत्नी) — जिनके पति नेहरू के प्रतिद्वंद्वी थे — को पहले विवाह से मना किया। क्यों? ताकि वे अविवाहित रहें? बाद में बहुत आग्रह के बाद ब्रह्मचर्य की शर्त पर विवाह की अनुमति दी। इस कारण ये दंपति तेजस्वी संतान से वंचित रहे।
5. लेकिन नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित और बेटी इंदिरा के लिए ऐसी कोई प्रतिज्ञा नहीं। यह भेदभाव क्यों?
6. गांधी_आश्रम के विचित्र नियम: लड़के-लड़कियां साथ में स्नान कर सकते थे (जो आज भी सामान्य नहीं है), लेकिन पति-पत्नी को अलग रहना था। यदि किसी को ‘तीव्र इच्छा’ हो तो ठंडे पानी से स्नान करने की सलाह। परंतु गांधी स्वयं अपनी सचिव प्यारेलाल की बहन और निजी चिकित्सक सुशीला नय्यर के साथ स्नान करते थे। जब इस पर प्रश्न हुआ तो उन्होंने कहा: “जब सुशीला स्नान करती है, मैं आंखें बंद रखता हूं। मुझे नहीं पता वह निर्वस्त्र है या वस्त्रों में, पर आवाज से पता चलता है कि वह साबुन इस्तेमाल कर रही है।”
7. सांप्रदायिक_हिंसा रोकने के बजाय गांधी ने ‘आत्मशुद्धि’ के नाम पर स्त्रियों के साथ नग्न सोकर ब्रह्मचर्य की परीक्षा लेने के प्रयोग किए। इसके लिए 13-14 वर्ष की मनु और आभा जैसी किशोरियों को चुना। आज यदि कोई तथाकथित संत ऐसा करे तो कैसी प्रतिक्रिया होगी?
8. 76 वर्ष की आयु में भी वे मनु और आभा के साथ एक ही बिस्तर पर सोते थे — तीन लोग एक साथ। इसका क्या औचित्य है?
9. आश्रमवासी और कांग्रेस के शीर्ष नेता इन बातों से अवगत थे। सरदार_पटेल ने 25 जनवरी 1947 को गांधी को पत्र लिखकर इन प्रयोगों पर आपत्ति जताई और उन्हें बंद करने का आग्रह किया। 16 फरवरी 1947 को फिर कठोर पत्र लिखा कि इन्हें प्रकाशित करना अनुचित है। बावजूद इसके गांधी अड़े रहे।
10. नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि गांधी इस विषय में पूर्णतः गलत थे और उन्हें समझ नहीं आता कि वे सेक्स के प्रश्न से इतने ग्रस्त क्यों हैं।
11. गांधी की मृत्यु के बाद मनु की मानसिक स्थिति खराब हो गई। मोरारजी_देसाई ने नेहरू को लिखा कि मनु की समस्या शारीरिक से अधिक मानसिक है और उसने जीने की आशा छोड़ दी है। आभा और अन्य स्त्रियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा होगा?
12. 1970 के दशक में सुशीला नय्यर ने कहा कि आलोचना से बचने के लिए इन कृत्यों को ‘ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ कहा गया। शुरुआत में इन्हें ऐसा नहीं कहा जाता था।
ऐसे गांधी को क्या अब भी ‘महात्मा’ कहा जा सकता है?

जयवंत_पंड्या जी की गुजराती पोस्ट का हिंदी अनुवाद पोस्ट साभार इंटरनेट

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